श्राद्ध का समय चल रहा है सनातन परंपरा के अनुसार यह 15 दिन पूर्वजों के लिए रखे गए हैं व उनका श्राद्ध किया जाता है कहा जाता है कि इस पक्ष में पूर्वज पृथ्वी पर वापस आते हैं व अपने अपने संतानों / वंशजो के घर जाकर उनकी कुशलता के बारे में जानते हैं इसी कारण लोग अपने घरों में अपने पूर्वजों की पसंद के अनुसार खाना बनाते हैं व पूर्वजों का तर्पण व बा्ह्मण भोज कर उनसे आशीर्वाद लेते हैं।

मैं भी वर्षों से इस परंपरा को निभा रहा था लेकिन हर बार मेरी अपने पूर्वजों से एक शिकायत रही की वो मेरे लिये कुछ विशेष नहीं छोड़ कर गए लेकिन वक्त बदला मैं खुद भी बदल गया तो यह समझ आया कि वह कितनी बड़ी पूंजी मेरे लिए छोड़ गये वो है सनातन धर्म जो मैं आज हिंदू हूँ यह उन्हीं का त्याग व बलिदान है वर्ना आज मैं कोई फलाना खां बन कर बकरीद पर बकरे काट रहा होता।

मैं नमन करता हूँ अपने समस्त पूर्वजों को उन्होंने हर तरह के दबाव सहने के बावजूद अपना धर्म नहीं बदला यह इस बात का प्रमाण है कि न तो वो लालची थे और न ही कायर जो पीढ़ी दर पीढ़ी हर प्रकार का दबाव झेलते रहे पर सनातन परंपरा कायम रखते हुए हिंदू रहे।

मेरा निवेदन अपने हिंदू भाईयों से कि वो भी इस बात को समझें व अपने पूर्वजों पर गर्व करें।

जयहिंद

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