यह हैं प्रसिद्ध कंथा वाचक जया किशोरी जी परंतु इनके रंग ढंग जरा देखिये यह अपनी सफलता में मद में ऐसी मस्त हो चुकीं हैं कि इन्हें साधारण भगवती जागरण गायिका व कथा व्यास की गरिमा का अन्तर का भी ज्ञान नहीं रहा जोकी व्यास गद्दी को छोड़ कर अपने साथियों व दर्शकों के बीच जाकर नृत्य का भद्दा प्रर्दशन करने में कोई संकोच नही कर रही हैं ।

यह सनातन धर्म का घोर अपमान है । एक तरफ़ तो महिलाओं का व्यास गद्दी पर बैठ कर भागवत कथा का वाचन अनुचित है उस पर ऐसा भोंडा प्रदर्शन देख कर साफ प्रतीत होता है सनातन धर्म ऐसी नर्तकियों के कारण गर्त में जा सकता है ।

– स्वामी आदित्य पशुपति

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