कोरोना अब गुजर रहा है ,
गांव ,शहर ,चौबारो से ।
इसको पानी खाद मिल रहा,
मरकज और मजारों से ।
सीमाएं तो सील हो गई,
भीड़ हटी बाजारों से ।
लेकिन खतरा बना हुआ है,
छुपे हुए गद्दारों से ।

कोरोना जब हमारे यहां शुरुआती दौर में आया तो सुनने को मिला की दिल्ली के जामिया मस्जिद में कुछ संदिग्ध लोग एकत्रित होकर रह रहे हैं और यह लोग कोविड-19 जैसे महामारी को फैलाने के लिए अग्रसर हो रहे हैं,जैसा कि इनको तबलीगी की जमात के नाम से जान आ गया, मैं दिल्ली सरकार या केंद्र सरकार से पूछना चाहता हूं कि आपके घर में कुछ संदिग्ध घुस आए और आपके घर को शमशान बनाने की योजना बनाने लगे और आप लोगों को भनक तक न लगी यह कैसे संभव है, और जब पता चला कि यहां पर कुछ संदिग्ध लोग इकट्ठा हैं तो आपने क्या किया, आप लोगों को चाहिए था की उन लोगों से पूछताछ की जाए और शक के दायरे में कैद कर लिया जाए, आप लोगों ने उनको कैद क्यों नहीं किया उनको हिदायत देकर क्यों छोड़ दिए, ताकि वह देश में फैल कर अपने मुहिम को फैलाने में कामयाब हो सकें, सिर्फ जनता को दिखाने के लिए आपने छापा मारा था छापा मारकर आपने क्या कर लिया, क्या आज तक आप लोगों ने किसी भी जमातिए को पकड़ पाए, नहीं
आखिर क्यों?
आप लोगों के ढील का कारण है आज देश की जनता कोविड-19 जैसे महामारी से ग्रसित हो रही है, यही शासन अगर उस समय लगाया गया होता तो शायद आज की डेट में जितने लोग ग्रसित हैं उतने ना होते,
आज तक जमात के सरगना को ना दिल्ली सरकार पकड़ पाए और ना ही केंद्र सरकार आखिर वह कहां चला गया दिल्ली निगल गई या फिर शासन – प्रशासन के हाथों में चूड़ियां पड़ गई

 

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