आज फेसबुक पर उंगलियां फेरते हुए ये फोटो सामने आ गया देखने में तो यह सामान्य सा चित्र है पर इसमें मौजूद लोगों के हाथों की मुद्राओं को देखकर उंगली रुक गई इसमें गांधी जी व एक महिला तो कीर्तन कर रहे हैं व तीसरा उपस्थित मुस्लिम व्यक्ति हाथ रोक कर बैठा है मतलब साफ है कि तब स्थिति जैसी थी आज भी वैसी ही है ।चाहें गांधी नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेसियो व सेक्युलरों ने खूब ऐसी तैसी कराई पर कोई इनकी मानसिकता न बदल सका ।

सच तो यह है कि यदि कोई कीर्तन भजन में ताली भी न बजा सके तो उसे वहाँ बैठने का भी कोई अधिकार नहीं है फिर चाहे उन्हे लात मारकर भी बाहर करना पडे संकोच नहीं करना चाहिए ।

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